Thursday, September 17, 2015

जो मिलके सितारे बिछुड गए 



जो मिलके सितारे बिछुड गए 
उसकी ये रात गवाही देती है,
करके तबाही जो निकल गए 
उन तूफानों कि गूँज सुनाई देती है |


महलों को वीराना करके चले गए ,
उन लोगों कि आहट सुनाई देती है |
कतरा-कतरा धुंधलाती यादों को
जो याद दिलाकर चले गए ,
उन यादों कि वो बात सुनाई देती है |


आशियाना जो अपना छोड़ गए ,
उन परिदों कि चहचाहट सुनाई देती है |
अपना बनाकर जो छोड़ गए ,
उन बेगानों कि तस्वीर दिखाई देती है |


साथ निभाकर कुछ पल का
जो तन्हा करके चले गए ,
साथ मे बीते उन लम्हों की
वो हंसी सुनाई देती है |


जो मिलके सितारे बिछुड़ गए 
उसकी ये रात गवाही देती है ,
करके तबाही जो निकल गए 
उन तूफानों की गूँज सुनाई देती है |


भोर 


उठ मुसाफिर भोर हुई अब, क्यूँ हार मान बैठा है

माना की आवाज़ नहीं है, समय के पदचापों में
वक़्त के आगे बेबस होकर, राजों को भी रंक होते देखा है
उठ मुसाफिर भोर हुई अब, क्यूँ हार मान बैठा है

गवाह है इतिहास हमारा, ऐसी अनगिनत गाथाओं का
जिसने, वीरों को समय के पहिये में, घुंघरू बांधते देखा है,
उठ मुसाफिर भोर हुई अब, क्यूँ हार मान बैठा है

है दर्द भरा दिल में जो तेरे, अश्कों में बह आने दे
इन अश्कों की बारिश में, बंजर को उपवन होते देखा है

उठ मुसाफिर भोर हुई अब, क्यूँ हार मान बैठा है

Wednesday, August 20, 2014

जिन्दगी ढूँढता हूँ

कर जिंदगी post facebook पर अपनी 
खुशियों का जरिया ढूँढता हूँ , 
जिंदगी की कहानी न जाने क्या होगी 
पर हर कहानी में जिंदगी ढूँढता हूँ |

Whatsapp से रखता हूँ हर खबर दोस्तों की अपने

इस शिथिल हो चुकी जिंदगी में रवानी ढूँढता हूँ ,
कमजोर नहीं सशक्त हूँ मैं
फिर भी अपनों का थोडा प्यार ढूँढता हूँ |

विचारों को करता हूँ Twitter पर tweet
Follower मिलें तो ठीक वरना Retweet करता हूँ ,
कुंठित हो चुके हैं विचार मेरे
बस दो जून की रोटी का जुगाड़ ढूँढता हूँ |

यूँ तो डरता हूँ अपनी परछाईं के अक्स से भी मैं
पर Instagram पर Pics अपलोड करता हूँ ,
आम आदमी हूँ मैं
जिंदगी में खुशियाँ और खुशियों में जिंदगी ढूँढता हूँ |

Internet और Smartphone को मान चुका हूँ जिंदगी अपनी
इसी में अब जिंदगी का सार ढूँढता हूँ ,
प्यासा हूँ मैं
जीने के लिए पानी ढूँढता हूँ |
                           

Monday, August 4, 2014


♥ तेरा शुक्रिया

मेरी जिंदगी में आने का शुक्रिया
मेरा साथ निभाने का शुक्रिया

मेरे बेरंग हो चुके ख्वाबों में,  रंग भरने का शुक्रिया

माफ़ नहीं कर पाया था जिन्हें, उन्हें माफ़ कराने का शुक्रिया
ढेरों दर्द थे दिल में, उन दर्द को मुक्ति दिलाने का शुक्रिया
एक दबी हुई नफरत को, प्यार में बदलने का शुक्रिया

तन्हाई में कभी कभी उदास हो जाता था मैं
उस उदासी को मुस्कान में बदलने का शुक्रिया

एक मरते अधूरे ख्वाब को
फिर से जिंदगी देने का शुक्रिया

फूल नहीं तेरे गुलशन का मैं
फिर भी मुझे सींचने का शुक्रिया

बदन तो भीगा हर बारिश में
इस बार मेरे दिल को भिगोने का शुक्रिया

रंग सात हैं इन्द्रधनुष में  
पर मुझे अपने रंग में रंगने का शुक्रिया

अविराम चलती जिंदगी में
अल्पविराम लगाने का शुक्रिया

जिंदगी भर के लिए ना सही, पर मेरी जिंदगी में आने का शुक्रिया
दो पल का ही सही, पर मेरा साथ निभाने का शुक्रिया |


Wednesday, July 30, 2014



COCKTAIL जिंदगी की 



कभी खुशी कभी गम की COCKTAIL है जिंदगी 
हर मोड़ पर मिलते आंसुओं और कभी आँसुओं में मिलती खुशी का मेल है जिंदगी 


कभी हो मुट्ठी में बंद, शांत चलती है जिंदगी 

कभी रेत की तरह फिसल जाती ये जिंदगी

कभी चमकते सितारों में ढूंडा जिंदगी को
कभी हाथ की लकीरों में 

कभी दूर रहकर भी पास थे जिंदगी के
कभी पास रहकर भी मिल ना पाए

कभी Google पे search करते मिल जाती जिंदगी 
कभी FACEBOOK पर हाथ मिला पाती जिंदगी 

कभी Cricket के IPL में मिल जाती जिंदगी 
कभी किताबों में फिर खो जाती जिंदगी 

जिंदगी की ये आँख मिचोली कभी समझ ना आई 
बस जिंदगी से मिलने की वो तड़प हमेशा बाकी रह गयी 

कभी Dominos में Pizza खाती मिल जायेगी ये जिंदगी
कभी 10 रूपए का Burger खाती भी मिल जायेगी ये जिंदगी 

यकीं ना आये तो देखना कभी 
किसी Bar, Pub या Disco में 
किसी हाथ में उठे गिलास में बनी COCKTAIL में मिल जायेगी ये जिंदगी 
                                      
                                       -कुमार योगेश